हर रिलेशनशिप की अपनी एक खास हीटिंग पीरियड होती है, लेकिन भारतीय सोसाइटी में जिस रिश्ते की बात सबसे कम होती है, लेकिन जो सबसे ज्यादा इमोशनल होता है—वो है ।
तो अगली बार जब आप अपने डैडी से लड़ें कि "यू आर टू कंट्रोलिंग", तो याद रखना—वो कंट्रोल प्यार है। और वो 'पहली बार' जब बाप ने आपको छोड़ा था स्कूल में, या पहली बार जब बाप ने आपको बस में अकेले भेजा था—वो दिन ही उसकी सबसे बड़ी जर्नी थी।
नीचे लिखा था: "मेरी बेटी। जिसके लिए मैंने पहली बार किसी के आगे हाथ जोड़े। जिसके लिए मैं पहली बार रोया। और जिसके जाने के बाद मैं पहली बार समझा कि घर घर नहीं लगता—घर वहाँ लगता है जहाँ बेटी की हंसी होती है।" आखिर में, बाप का पहली बार कमजोर पड़ना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। ये स्टोरी हर उस बेटी को समर्पित है जो सोचती है कि उसका बाप स्ट्रॉन्ग है। सच तो ये है—जब बेटी सोती है, तो बाप तकिए में मुंह छुपाकर, पहली बार बस इतना कहता है: एक सख्त अकाउंटेंट)
(शेयर कीजिए इस पोस्ट को हर उस बेटी के साथ जो शहर से दूर रहती है, और हर उस बाप के साथ जो बेटी को याद करके चुप रह जाता है।)
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कहानी तब शुरू होती है जब रिया को मुंबई में एक जॉब ऑफर मिलता है। पूरे घर में खुशी थी, पर आदित्य के चेहरे पर वो मुस्कान थी जिसके पीछे एक चीख दबी थी।
टीवी सीरियल्स में हम सास-बहू के झगड़े तो खूब देखते हैं, पर जब बात आती है 'पहली बार बाप अपनी बेटी के सामने कमजोर कैसे पड़ता है'—तो वो सीन ही कुछ और होता है। ये आर्टिकल उसी पहली बार की कहानी है। एक स्टोरी जिसे हर बाप और हर बेटी को पढ़ना चाहिए। पात्र: आदित्य (45 वर्ष, एक सख्त अकाउंटेंट), और उसकी 21 साल की बेटी, रिया। और उसकी 21 साल की बेटी
रिया ने हंसते हुए कहा, "Papa, I am 21. I am not a kid." लेकिन तभी कमाल हो गया। आदित्य ने अपनी जेब से निकालकर एक छोटा सा गिफ्ट रखा—पेपरस्प्रे और एक छोटा सा हैंडीकैम।